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कान्हा की नगरी में ब्रज की लठमार होली, फूलों की होली और लड्डू होली की शुरुआत.

ब्रज होली रंगोत्सव की शुरूआत 3 फरवरी से शुरू हो चुकी हैं.

by Sunil Kumar Bharti
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कान्हा की नगरी में ब्रज की लठमार होली, फूलों की होली और लड्डू होली

Braj Holi 2025 News : उत्तर प्रदेश में कान्हा की नगरी मथुरा, वृंदावन, नंदगांव और बरसाना सहित ब्रज क्षेत्र में 40 दिनों तक प्रत्येक वर्ष होली का त्योहार पूरे रंगमय, हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। जो पूरे देश में ‘ब्रज की होली’ के नाम से प्रसिध्द है। ब्रज की होली को मनाने के लिए देश और दुनिया से लाखों की संख्या में लोग ब्रज रंगोत्सव में शामिल होने के लिए आते हैं। दरअसल कृष्ण की नगरी मथुरा में होली कई तरह से खेली जाती है, जिसके लिए अलग- अलग दिन निर्धारित किए गए हैं।

वहीं इन दिनों यहां पर होली की अलग ही रौनक देखने को मिलती है। लट्ठमार होली राधा और कृष्ण की चंचल परंपराओं को दर्शाने के लिए हुरियारिनों (महिलाएं) लाठियों से पुरुषों का पीछा करती हैं और उन्हें रंग लगाती है। वहीं पुरुष लाठी से अपना बचाव करते हुए दिखते हैं। फूलों की होली बांके बिहारी मंदिर रंगों के बजाय फूलों की पंखुड़ियों के साथ होली का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है। होली पर चारों ओर का नजारा देखकर आपका दिल खुशी के झूम उठेगा।

कान्हा की नगरी में ब्रज होली के प्रकार.

ब्रज की होली कई प्रकार से खेली जाती है। यहां पर होली को हर्षोल्लास के साथ मनाने के लिए विभिन्न रीति-रिवाज शामिल हैं जैसे- लठमार होली, जहां पर हुरियारिनों (महिलाएं) पुरुषों को लाठियों से मारती हैं, रासलीला, जिसमें राधा और कृष्ण के दिव्य प्रेम को नृत्य और संगीत के माध्यम से दिखाया जाता है। इसी के साथ यहां की फूलों वाली होली को हर कोई खेलने की इच्छा रखता है।

ब्रज होली रंगोत्सव की शुरूआत 3 फरवरी से शुरू हो चुकी हैं.

ब्रज की होली खेलते हुए अलौकिक दृश्य-फोटो सोशल मीडिया.

3 फरवरी को बसंत पंचमी के दिन वृंदावन में ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में विशेष श्रृंगार आरती के बाद ब्रज की होली रंगोत्सव की शुरुआत हो गई थी। सबसे पहले ठाकुर जी को गुलाल लगाया था, उसके बाद लाडली जी के मंदिर में ध्वजारोहण किया गया था।

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8 से 14 मार्च तक रंगमय होली, 15 से 22 हुरंगा कार्यक्रम.

ब्रज की प्रसिध्द रंगोत्सव होली में लठमार होली, फूलों की होली, लड्डू होली और हुरंगा शामिल हैं। जिनकी तारीख इस प्रकार है:-

.8 मार्च को बरसाना में लठमार होली खेली गई।
.9 मार्च को नंदगांव में होली मनाई गई।
.वृन्दावन के बांके बिहारी मंदिर में 10 मार्च को फूलों की होली खेली गई।
.13 मार्च को होलिका दहन होगा।
.14 मार्च को होली (धुलेंडी) खेली जाएगी।
.15 से 22 मार्च तक बलदेव के दाऊजी मंदिर पर हुरंगा समारोह का आयोजन होगा।

हुरंगा समारोह क्या होता हैं.?

बरसाना की होली का सुन्दर तस्वीर-IMAGE SOCIAL MEDIA

हुरंगा मथुरा के बलदेव गांव में होली के बाद खेला जाता है। इस समारोह का नाम भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलदेव (दाऊजी) के नाम पर रखा गया है। परम्पराओं के अनुसार, हुरंगा पारंपरिक रूप से भाभियों और देवरों के बीच खेला जाता है। जिनकी तारीख और कार्यक्रम की जगह इस प्रकार है:-
.15 मार्च- हुरंगा बलदेव का दाऊजी मंदिर
.16 मार्च- हुरंगा नंदगांव
.17 मार्च- पारंपरिक हुरंगा जाओ गांव
.18 मार्च- चरकुला नृत्य मुखराई
.19 मार्च – हुरंगा बताइन
.20 मार्च – हुरंगा गिदोह
.21 मार्च – हुरंगा खैरा- जिसे रंग पंचमी भी कहते हैं।
.22 मार्च- होली उत्सव रंगनाथ जी मंदिर, वृंदावन

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